---Advertisement---

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जमानत मिलने के बाद रॉबर्ट वाड्रा का कहना है कि ईडी सरकार के आदेश पर काम कर रही है: ‘छिपाने के लिए कुछ नहीं’

On: May 16, 2026 7:19 AM
Follow Us:
---Advertisement---


प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच की जा रही शिकोहपुर भूमि सौदे से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत द्वारा जमानत दिए जाने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा ने शुक्रवार को कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने रॉबर्ट वाड्रा की याचिका पर सुनवाई के एक दिन बाद मामले में आरोप पत्र पर विचार करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी। (हिन्दुस्तान टाइम्स/फ़ाइल)

वाड्रा ने यह भी आरोप लगाया कि ईडी प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के “इशारे” पर काम कर रही है नरेंद्र मोदी।

जमानत मिलने के बाद अदालत के बाहर पत्रकारों से भद्रा ने कहा, “मैं देश की न्यायपालिका में विश्वास करता हूं। मैं जानता हूं कि प्रवर्तन निदेशालय सरकार द्वारा चलाया जा रहा है और ईडी सरकार के आदेश पर ही चलती रहेगी। मेरे पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। मैं हमेशा यहां रहूंगा और सभी सवालों के जवाब दूंगा।”

खुद को ”निडर” बताते हुए वाड्रा ने कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया का सामना करने के लिए तैयार हैं और मामला आगे बढ़ने पर सभी प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं का पालन करेंगे।

यह घटनाक्रम दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा मामले में आरोपपत्र पर विचार करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली भद्रा की याचिका पर सुनवाई के एक दिन बाद आया है।

क्या है शिकोहपुर ज़मीन सौदे से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला?

मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) मामला फरवरी 2008 में स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लेनदेन से उत्पन्न हुआ, जो एक कंपनी है। पहले डायरेक्टर के तौर पर काम कर चुके रॉबर्ट वाड्रा ने हरियाणा के शिकोहपुर में करीब 3.5 एकड़ जमीन खरीदी. 7.5 करोड़.

बाद में यह ज़मीन 2012 में रियल एस्टेट प्रमुख डीएलएफ को बेच दी गई जिसकी कीमत 58 करोड़ रुपए काफी बढ़ गई है।

ईडी के अनुसार, लेन-देन एक बड़ी योजना का हिस्सा था जिसमें अपराध की आय का सृजन और स्तरीकरण शामिल था। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के दौरान अनुचित लाभ दिए गए, जिसमें भूमि का त्वरित रूपांतरण और विकास परमिट देना शामिल था, जिससे इसके बाजार मूल्य में काफी वृद्धि हुई।

कोर्ट ने सुनवाई की

गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में रॉबर्ट वाड्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि कथित अपराध 2008 और 2012 के बीच की अवधि के थे, जबकि कुछ अपराध केवल पीएमएलए की अनुसूची में जोड़े गए थे।

ईडी की ओर से पेश वकील जोहेब हुसैन ने याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि याचिका कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है। न्यायमूर्ति मनोज जैन ने मामले की अगली सुनवाई 18 मई तय की।

एक दिन बाद वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत, वकील प्रतीक चड्ढा और अक्षत गुप्ता के साथ राउज एवेन्यू कोर्ट में वाड्रा की ओर से पेश हुए। शिकोहपुर भूमि सौदे से संबंधित पीएमएलए मामले में जारी समन के तहत भद्रा भी अदालत में पेश हुए।

अदालत ने पिछले महीने इस संबंध में उनके और अन्य के खिलाफ दायर ईडी के आरोपपत्र पर संज्ञान लिया।

अदालत ने ईडी की इस दलील पर भी गौर किया कि आगे की जांच चल रही है, खासकर अपराध की एफआईआर में नामित अन्य एजेंसियों की भूमिका के संबंध में। अदालत ने उम्मीद जताई कि जांच एजेंसी व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए ऐसे सभी पहलुओं की गहनता से जांच करेगी।

(एएनआई इनपुट के साथ)



Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment